मैं और मेरी दुनिया

एक मुसाफिर के सफ़र जैसी है सबकी दुनिया

Monday, June 5, 2017

आवारगी

परिंदों का उड़ना
महज अपने आकाश को पाना नहीं होता
वो फड़फड़ाते है पंख
लगाते हैं गोल-गोल चक्कर
कि कभी-कभी
बिलावजह की आवारगी भी
जरुरी है यारा
----स्वयंबरा

1 Comments:

At June 6, 2017 at 7:57 AM , Blogger Digamber Naswa said...

बहुत खूब ...
सच में जरूरी है ... ये अपने लिए समय निकालना भी तो है ...

 

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