Posts

Showing posts from May 31, 2009

दहेज़- बापू का dar

अरी ओ बडकी की अम्मा! मुंह मीठा कर, ब्याह तय हो गयालड़केवाले ने मोटरसाईकल , रंगीन टीवी, फ्रिज, दस भर सोना और कुल जमा 'पांच लाख' रुपये के लिए कहा हैअब सोच मतइंतजाम हो जाएगाहाँ री, मैंने घर को गिरवी रख दिया है ,न होगा तो बेच देंगे,अरे क्या रखा है इसमें याद है पिछली बरसात?पहली बारिश में ही हमारे इस कमरे की पूरी छत बरस पड़ी थी हाँ, रिश्तेदारों के पास भी दौड़ना होगा क़र्ज़ के लिएअब गाढे समय में वही तो काम आयेंगे भले ही मूल के साथ सूद भी मांगेंगे सुन तो,कल पी. ऍफ़. के लिए अर्जी दे दूंगाअब तो,पार्ट टाइम भी करना होगा,न न !अरे, डर मत!अब तबीयत को कुछ नहीं होगा'मरूँगा' भी नहींबेटी की शादी जो है सुन बडकी की अम्मा!छोटकी की पढाई रोकनी होगी ,कुछ सालों तक हाथ तंग रहेंगे न,समझा लेना उसे, अच्छा! बडकी की अम्मा !बस, कभी-कभी डर लगता है किइतने पर भी जो न हो सका दहेज़ पूरातो क्या हमारी बडकी को भी जलना होगाया गले में फंदा डालकर झूल जाना होगाऔर हमें इस संतोष के साथ जीना होगा किहमने तो अपनी बडकी का ब्याह कर दिया था न?कर दिया था न अपनी बडकी का ब्याह?