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Showing posts from January 21, 2018

भ्रम

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भ्रम का बने रहना जरुरी है
भ्रम कि चाँद सुन्दर है
भ्रम कि सूरज उगता है
भ्रम कि उम्र बीतने पर
दर्द कमता जाता है
भ्रम कि दुःख बांटने से
बंटता-छंटता जाता है
भ्रम कि ईश्वर है
भ्रम कि कर्ताधर्ता भी वही है
भ्रम कि तुम्हें मुझसे प्यार है
भ्रम कि तुझसे सारा संसार है
भ्रम कि लोकतंत्र सच में लोक का है
भ्रम कि देश आज़ाद जनो का है

भ्रम न रहे तो जाने क्या हो मन का
भ्रम से परे कहाँ हास जीवन का
भ्रम भरम में सारा जग भरमाया
फिर भी जीना इसी भरम से आया
---स्वयंबरा

पेंशन

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माई बीमार थी...
अब-तब की बात थी...
बड़कावाले अस्पताल में भर्ती कराया गया
पांच हज़ार खर्चा हुआ...
बहुत दौड़-भाग हुआ...
दिन-रात का सेवा हुआ...
भाग था कि बच गयी...
बची साँसे मिल गईं

नहीं तो भारी आफत था ...
बहुत बड़ा आफत था
परिवरवे बर्बाद हो जाता..
एकदमें बर्बाद हो जाता...
तब बंद हो जाती गीतवा की पढ़ाई....
बंद हो जाता परबीनवा का दूध...
सुधवा का बियाह त होबे नहीं करता....
बाबू-मान के आँखे अंधार छाया रहता...

बाकि बच गयी माई
बरहम बाबा को मनाया गया था
बुढ़िया माई भीरी भी गोहार लगाया गया था
ए माई  ए माई कहते भर रात काटा गया था

आ बच गयी माई...
मने कि बच गया माई का परिवार
मने कि सुखी रहेगा माई का परिवार
बस जीती रहे माई

काहे कि जबले जीती रहेगी माई
तब ले मिलता रहेगा माई का 'पेंशन'
तब ले मिलता रहेगा परबीनवा को दूध,
गीतवा को किताब
आ सुधवा के बियाहो होईये जाएगा
-----स्वयंबरा

जिंदगी और कुहासा

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घने कुहासों में
जब कुछ नहीं सूझता
जब पेड़ मौन साये से बन जाते है
दिन सहमा-सिकुडा बेरौशन सा
जब 'जीवन' जी लेने की जद्दोजहद में लगा होता है
बर्फ होती साँसों को बचाए रखने की कोशिशें करता है जब सफ़ेद धुंधलके के सामने हम बेबस हो जाते हैं
जब सारे रस्ते खो जाते हैं....
तब ......
सड़क पर दोनों ओर खींची सफ़ेद पट्टी राह दिखाती हैं
या दूर से आती टिमटिमाती रौशनी दिलासा दे जाती है
बच्चों की एक टोली खिलखिलाते हुए गुज़र जाती है
एक माँ अपने कई छौनों को दूध पिलाती है
और .......
और एक पेड़ की शाख पर बने घोंसले में जिंदगी
धीमे-धीमे मुस्कुराती है..
---स्वयंबरा