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Showing posts from January 13, 2013

लहराता परचम बाल महोत्सव का

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पिछ्ले वर्ष दिसंबर माह के आखिरी सप्ताह  में यवनिका संस्था के तत्वावधान  में वीर कुंवर सिंह स्टेडियम, आरा, बिहार में बाल महोत्सव का आयोज़न हुआ , जिसमे चित्रकला, कहानी/कविता लेखन, भाषण, सामान्य ज्ञान, सामान्य विज्ञान, नृत्य, गायन, एकल अभिनय, नाटक, फैंसी ड्रेस , कविता - पाठ जैसी प्रतियोगिताओं में लगभग 2 हज़ार बच्चों ने भाग लिया . देश में अपनी तरह का यह अनोखा और इकलौता  कार्यक्रम है जिसमे साहित्य और कला के प्रति बच्चों में रुझान पैदा करने की कोशिश की जाती है .

 वर्ष 2012  इस उत्सव का नौवा साल था . मतलब कि इस आयोज़न ने एक ठोस परम्परा का रूप ले लिया है,  बच्चे जिसका इंतज़ार बड़ी बेसब्री से करते हैं . वास्तव में यह एक ऐसा मंच बन चूका है जहाँ नन्हे-मुन्ने अपनी प्रतिभा का परचम लहराते है और  निखार पाकर पूरी दुनिया को अपनी हुनर का कायल बना देते है .

बेपरवाह मस्ती और सबकुछ जान लेने की सृज़नात्मक जिज्ञासा का छोटा सा अक्स है  बचपन . उम्र का यह दौर निश्चिंतता, उन्मुक्तता , मासूमियत, शरारत और अथाह  संभावनाओं से  भरा होता है . कल्पनाओं की  ऊँची उडान भरते हुए , दादी- नानी की  कहानियाँ सुनते हुए बच्चे…