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Showing posts from March 11, 2012

ज्ञान्ति : जिन्दगी अब भी 'खूबसूरत' है

नाम है ज्ञान्ति....उम्र करीब बीस साल...घर-घर में चौका-बर्तन करके अपना और अपने तीन बच्चों का पेट पालती है...आँखों में एक ही सपना संजोये है कि बच्चे पढ़-लिख जाएँ...उन्हें अच्छे संस्कार मिले...आप सोच रहे होंगे कि इसमें नया क्या है... ऐसी कहानियों से तो रोज ही दो-चार होना पड़ता है ....पर जनाब, इस एक कहानी में जो जिजीविषा है वो हम भाषण देनेवालों में नहीं....हम बोलते बहुत है पर जिन्दगी जब इम्तहान लेने लगती है तो हमारे पसीने छुट जाते है...और यहाँ??? यहाँ तो कड़ी मिहनत, समाज के तीखे तेवरों के बावजूद चेहरे से मुस्कराहट जाती ही नहीं...वो छम-छम करती आती है....गुनगुनाती हुई घर के काम करती है और चली जाती है ...

पर यह सबकुछ जितना आसान, खूबसूरत, सुकून से भरा दिखता है उतना है नहीं...जानते है क्यूँ??? जनाब, वो एक  विधवा है ...जवान भी ...ईश्वर ने खूबसूरती भी दोनों हाथो से लुटाई है....और ये सभी बाते उसके खिलाफ जाती  है... kyunki चाहे लाख दावा कर ले पर रूढ़ियाँ और मानसिक विकृतियाँ अब भी हमें जकड़े हुए है ... समाज  विधवा को हेय दृष्टि से देखता है...मांगलिक कार्यों में उसका होना अशुभ  है तो दूसर…