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Showing posts from August 24, 2008

छनिकाएं -भूख की

1
मर गई 'वह'
'भूख 'से बिलबिलाते
सोती रही 'मानवता '
2
'प्रेम' की जगह
लिख दो 'भूख '
लैला-मजनू
अब पैदा नही होते

आदमी 'भूखा 'है
वो नोचता है दूसरों को
उन्हें मार देने तक

बाढ़ की तबाही

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बिहार में बाढ़ का  तांडव  फिर से शुरू है  .बिफरी हुई  सोन नदी  अपनी सारी सीमाओं को तोड़ती हुई विनाश कर रही है.  पर इस बार ये  बाढ़ प्रकृति का प्रकोप नहीं बल्कि नहीं बल्कि मानवीय कारगुजारियो का प्रतिफल है. सोन नदी पर मध्य प्रदेश में बांध  बना है. इस पर निर्मित इन्द्र बैराज से बिहार की और पानी छोड़ा जाता है. इस बार भी ये हुआ और गरजती हुई नदी का पानी बड़ी  वेग से बिहार में प्रवेश कर गया . परिणाम ये है की बिहार के लगभग आधा दर्ज़न जिलों में बाढ़ आ चूका है. ६-७ घंटे पहले जो नदी सूखी पड़ी थी उसमे देखते ही देखते इतना पानी आ गया की कई गाँव डूब गए. ये सब इतनी जल्दी  हुआ कि किसी को सँभालने का मौका तक नहीं मिला. हालाँकि जब ये पानी बिहार में प्रवेश किया तो प्रशासन  द्वारा इसकी सूचना दी गयी पर सोन के कगार पर बसे गाँव के निवासिओं को इसपर यकीन नहीं हुआ. उन्हें अपने अनुभवों पर ज्यादा  भरोसा था. पर अब चारो और हाहाकार मचा हुआ है. इस तबाही  में हमारा भोजपुर जिला भी शामिल है. सच,  कुदरत के सामने मानव कितना बेबस हो जाता है .                ये बाढ़ हर साल हमारे लिए बर्बादी की सौगात लाता है.पर ये  तबाही बस …

दीपक, बुलंद इरादोवाला एक बच्चा

दीपक, एक ऐसा बच्चा जिसने मुझे जिन्दगी जीने कि प्रेरणा दी .कुदरत ने उसके साथ नाइंसाफी की है. वो गूंगा और बहरा है. पर उसके हौसले  हिमालय जैसे बुलंद हैं . उन दिनों मै सिविल सेवा के लिए इंटरव्यू में चयनित नही होने के कारन हताश थी. इसी समय मुझे इस मासूम के बनाये चित्रों की प्रदर्शनी में बुलाया गया. अनमने ढंग से देखने गई. दीपक और उसके बनाये चित्रों को देखकर अवाक् रह गई. हँसता-मुस्कुराता वह बच्चा कितनी आसानी से अपनी विकलांगता को ठेंगा दिखा रहा था और मै एक छोटी सी हार से हताश हो गई थी. उस बच्चे के इरादों ने मुझे फिर से लड़ने के लिए तैयार कर दिया. जैसे कि एक भयानक सपना देखकर जाग गई. घर आई तो मेरी लेखनी खुद ब खुद चल पड़ी, जिसने दीपक के ऊपर लिखी गई कविता का रूप ले लिया-

तू विधु शीतल कोमल-कोमल,
नन्हा-दीपक निर्झर झर-झर
असाधारण-अखंड -ज्योति तू जो
जलता है हरदम हर-हर पल
या की सतजुग का कोई ऋषि
उस, निराकार का अभिलाषी
या 'दिनकर' का तू 'रश्मिरथी'
संघर्षशील पुरुषार्थ वही
ना-ना तू है वो 'निराला-राम'
तम्-रावण को हरता हर कही
या जन्मा तू अवतार कोई
कहने महत्ता 'ढाई-आखर' की ,
कि मै औ&#…