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Showing posts from September 28, 2014

था एक धनुर्धर राम

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सूर्य-प्रभ-सम आलोकित, वह वीर धनुर्धर था अद्भुत, रावण-तम का संहार किया, पुरुषोत्तम जग में कहा गया .

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शर- संधान करो तुम तम जन-मन का हरो तुम माया मृग फिर छलने आया अब तो हुंकार भरो तुम