Posts

Showing posts from July 27, 2014

मेरे तुम !

Image
तुमने कहा
अकेले हो जाते हो
जब नही होती पास तुम्हारे
फिर तुम कह्ते हो
एकाकार हो मुझसे
आत्मा हूँ तुम्हारी
सुनो तो,
यह कैसी अजब बात है
अकेले होने का अह्सास
और एकत्व
अलग नही एक-दूसरे से?
लेकिन शायद यह ठीक भी है
क्युंकि तुम खुद भी विरुद्धो का सामंजस्य हो
बिल्कुल मेरे आराध्य की तरह
.......स्वयम्बरा
( विरुद्धो का सामंजस्य 'भगवान शंकर' के लिये कहा जाता है)

किस गांव की बात करते हो जी ?

Image
किस गांव की बात करते हो जी ! किस्से- कहानी  वाले ?  मन को बहलानेवाले ?  सपनो मे आनेवाले ? 
दिखाओ जी दिखाओ,
कहाँ हैं ये गांव ?
किस जगह जमती है चौपाल?
कहा सुने जाते है बिरहा, चैता, फगुआ के तान
किस डाल पर पडता है झुला
कहा गाती है वे बेखौफ, कजरिया
मिहनत और श्रम, भोले से जन
होते है क्या?

ना जी ना
वो गांव एक छलावा था
बस, एक दिखावा था
सच तो यह कि
शहर बनने की होड मे
विद्रुप हो गए गांव
कुरुप हो गए गाव

डर है वहा,