मैं और मेरी दुनिया

एक मुसाफिर के सफ़र जैसी है सबकी दुनिया

Tuesday, July 22, 2008

vakt

वक्त माना tu अभी अच्छा नही
टूट jआऊँ साख से पत्ता नही
मान ले हिम्मत नही तुझमे अरे
कह रहा क्यों एक भी रास्ता nahi

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