मैं और मेरी दुनिया

एक मुसाफिर के सफ़र जैसी है सबकी दुनिया

Friday, August 22, 2008

मेरी प्रेरणा

छोटे से शहर से निकलकर दिल्ली में आना और अपनी जगह बनाना कम से कम मेरे लिए एक बहुत बड़ी बात है । ऐसे में कई बार हार जाने जैसा अहसास होता है । पर हरिवंश राय बच्चन की ये पंक्तिया हमेशा मुझे हौसला देती है।मेरे जैसे और लोगो के लिए समर्पित है ये कविता.........

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है।
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है।
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,
जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है।
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में।
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो।
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्श का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम।
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती...

5 Comments:

At August 22, 2008 at 4:21 AM , Blogger मीत said...

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At August 22, 2008 at 4:37 AM , Blogger मीत said...

This comment has been removed by the author.

 
At August 22, 2008 at 4:37 AM , Blogger मीत said...

is kavita ko kon nahin janta?
pr haan apne ise blog par dala acha kiya jinhone nahin padi shayad unki nazr is par padh jaye..
waise kuch din pahle maine bhi ise apne blog par dala tha...
jari rahe..
ek bat or
aapki ek bahan bhi blog likhti hai na priyambra..
wo bhi bahut acha likhti hai, par pata nahin kyo usne likhna band kiya hua hai pls use bolo fir se likhne ke liye..
her's blog my in my favourite

 
At August 22, 2008 at 5:18 AM , Blogger Bandmru said...

mujhe ye puri kavita malum nahi thi. thanks ab yaad ho gai.

waise aapki sari rachnayen aachchhi hain thanks again.

likhna band nahi kariyega......
kya hua main likh nahin sakta padh to sakta hu na.......

milte hain next post pr, tb tak ke liye.............

 
At August 22, 2008 at 7:35 AM , Blogger ritesh said...

swayambara ji..namaskar...bahut dinon baad aapne blog ko update kiya hai..kitni gahrai hai aapme...aap patrikawom me apni rachna kyun nahi deti...aapne nahi bataya ki aap kahan hain aur kya kar rahi hain....shabddharm jari rakhen...

 

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