दरद न जाने कोए .....

कहते हैं
जिन्नाद ने पकड़ा है उसे
वो चीखती है, चिल्लाती है
अट्टाहास लगाती है
गुर्राती है, मुट्ठियाँ भींचती है
खरोंच डालती है खुद को
और कभी-कभी,
एकदम गुमसुम सी हो जाती है
चुप्पी बैठ जाती है होंठो पर
खारा पानी समूचे जिस्म पर छा जाता है
‘बाबा हो बाबा’ की गुहार लगाती है
उसकी चीत्कार से आकाश तक काँप उठता है
कहते हैं कि
यह जिन्नाद पड़ोस के उसी लडके का है
हाँ, तभी तो एक माह पहले
जब खेत के बीचोंबीच
उसकी कटी हुई लाश मिली थी
यह बदहवास सी भागती गयी थी वहाँ
और लौटी तो.......
तो वह थी ही नहीं भई
उसे तो जिन्नाद ने पकड़ लिया था  

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बहुत सुन्‍दर भावों को शब्‍दों में समेट कर रोचक शैली में प्रस्‍तुत करने का आपका ये अंदाज बहुत अच्‍छा लगा,

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