उपनिवेशवाद के दौर में भारतीय क्रिकेट

क्रिकेट इतना नहीं पसंद कि बेचैन रहूँ देखने के लिए...पर इसके बारे में जानना रुचिकर लगा कि कोलोनाईजेशन के दौर में यह जेंटलमैन गेम आखिर इंग्लैण्ड से भारत कैसे आया...कैसे इसका विकास हुआ..

इंग्लैंड, जहां क्रिकेट का जन्म हुआ, वहाँ ये वर्गीय विभेद का बड़ा उदाहरण था...उच्च आय वर्ग वाले शौक के लिए इसे खेलते इसलिए वो बैट्समैन होते...निम्न आयवर्ग वाले पैसे के लिए खेलते इसलिए बॉलर थे...और एक बॉलर कभी कैप्टेन नहीं बन सकता था...शायद इसलिए शुरुआती नियम अधिकतर बैट्समैन के पक्ष में ही बने थे...

ब्रिटिशों ने भारतीयों को असभ्य, जंगली ही माना था...उन्होंने कभी सोचा भी नहीं कि भारतीय इसे खेल पाएंगे...पर ऐसा हुआ नहीं..भारतीयो में पारसी समुदाय ने क्रिकेट खेलने की शुरुआत की...बाद के एक टूर्नामेंट में इनलोगों ने अंग्रेजों के जिमखाना क्लब को हरा दिया...ये एक बड़ी बात थी..

अंग्रेजों ने इस खेल को भी फूट डालने के लिए इस्तेमाल किया और हिन्दू, इस्लाम, पारसी आदि धर्मों  के आधार पर क्रिकेट क्लब बनाने पर जोर दिया....

आज की रणजी ट्रॉफी की तरह एक टूर्नामेंट आज़ादी से पहले भी हुआ करता था पर उसमे धार्मिक आधार पर बने क्लब भाग लेते...इस कारण गांधी जी ने भी इस टूर्नामेंट की आलोचना की थी....

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