मैं और मेरी दुनिया

एक मुसाफिर के सफ़र जैसी है सबकी दुनिया

Sunday, June 11, 2017

मुँह टेढ़े चाँद

ये तो क्षण मात्र की ही कैद थी...
तुम कहाँ बंधनो में आनेवाले..
तो अब जाओ....
मुझे भी तुम नहीं चाहिए ....
मुंह टेढ़े चाँद😑

(एक झूठ❤☺)
--स्वयंबरा

1 Comments:

At June 26, 2017 at 11:13 AM , Blogger JWO V Ranjan said...

Jhoot to haiii....
Par isme ek bedna bhi hai...
Na to us tak pahunch paane ki ...
Aur na hi waisa ban paane ki...

 

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