मैं और मेरी दुनिया

एक मुसाफिर के सफ़र जैसी है सबकी दुनिया

Sunday, June 4, 2017

ओ सूरज

सूरज...
प्रखर ...तेजस्वी...
इसके बिना जीवन नहीं..
पर कितना अकेला...
अक्सर जी चाहता है कि माथा सहला दूँ.... पूछ ही लूँ - कैसे हो भाई? ठीक ठाक न? खाना वाना हुआ? सोए भी थे या रात भर भटकते रहे?
😊😊

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