ओ सूरज

सूरज...
प्रखर ...तेजस्वी...
इसके बिना जीवन नहीं..
पर कितना अकेला...
अक्सर जी चाहता है कि माथा सहला दूँ.... पूछ ही लूँ - कैसे हो भाई? ठीक ठाक न? खाना वाना हुआ? सोए भी थे या रात भर भटकते रहे?
😊😊

Comments

Popular posts from this blog

एक उपेक्षित धरोहर !

सपना ही था

पिता का होना कितना बड़ा संबल है