मैं और मेरी दुनिया

एक मुसाफिर के सफ़र जैसी है सबकी दुनिया

Sunday, June 4, 2017

अकेलेपन का मान

अकेले रहना किसे पसंद
पर जब मज़बूरी ही हो
कि कोई साथ न हो
तो 'एकांत' खुद की तलाश है - कह देना
और अपने एकाकीपन को
उनकी 'सहानुभूति' में बदल जाने से रोक लेना जरुरी होता है
कि अकेलेपन का भी तो 'मान' होता है यारा
-----स्वयंबरा

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

Links to this post:

Create a Link

<< Home