अबोला

कहाँ सोचा था
कि हमारे बीच का 'अबोला,'
इतने शब्द, इतनी ध्वनिया छोड़ जायेगा
कि बदहवास-सी दौडती फिरुंगी
उन्हें आँचल में समेट लेने को
---स्वयंबरा

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