मैं और मेरी दुनिया

एक मुसाफिर के सफ़र जैसी है सबकी दुनिया

Saturday, June 10, 2017

अबोला

कहाँ सोचा था
कि हमारे बीच का 'अबोला,'
इतने शब्द, इतनी ध्वनिया छोड़ जायेगा
कि बदहवास-सी दौडती फिरुंगी
उन्हें आँचल में समेट लेने को
---स्वयंबरा

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

Links to this post:

Create a Link

<< Home