मैं और मेरी दुनिया

एक मुसाफिर के सफ़र जैसी है सबकी दुनिया

Monday, June 5, 2017

शोर

नींद नहीं आती अक्सर
अनंत आवाजों ने
मन की परतों के भीतर
डेरा जमा लिया है
ये अपनी ही सुनाए जातीं हैं
और सारी रात आँखों में कट जाती है
खीझ उठती हूँ ..झल्लाती हूँ..
फटकार भी लगाती हूँ
सब व्यर्थ
पर कल खूब गहरी नींद आयी
जेनरेटर के गड़ गड़
लाउडस्पीकर के बेसुरे कंठस्वर
पटाखों के धमाकों
लोगों के कहकहों के बीच
बेसुध सो गयी
पूरे सात घंटे सोयी रही
आज जाना मैंने
कि 'भीतर के शोर' से बचने के लिए
बाहर,'शोर' का होना जरुरी है यारा
---स्वयंबरा

1 Comments:

At June 6, 2017 at 8:00 AM , Blogger Digamber Naswa said...

सच तो है अगर भीतर का शोर बहार का शोर सुनने दे ...

 

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

Links to this post:

Create a Link

<< Home